श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 59: ययाति का अपने पुत्र पूरु को अपना बुढ़ापा देकर बदले में उसका यौवन लेना और भोगों से तृप्त होकर पुनः दीर्घकाल के बाद उसे उसका यौवन लौटा देना, पूरु का अपने पिता की गद्दी पर अभिषेक तथा यदु को शाप  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.59.6 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा राजा पूरुमथाब्रवीत्।
इयं जरा महाबाहो मदर्थं प्रतिगृह्यताम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
यदु के ये वचन सुनकर राजा ने पुरु से कहा - 'हे महाबली! मेरी सुख-सुविधा के लिए आप इस वृद्धावस्था को स्वीकार कर लें।'
 
On hearing these words of Yadu, the king said to Puru - 'O mighty one! For my comfort and convenience, you should accept this old age.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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