श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 59: ययाति का अपने पुत्र पूरु को अपना बुढ़ापा देकर बदले में उसका यौवन लेना और भोगों से तृप्त होकर पुनः दीर्घकाल के बाद उसे उसका यौवन लौटा देना, पूरु का अपने पिता की गद्दी पर अभिषेक तथा यदु को शाप  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.59.20 
यदुस्तु जनयामास यातुधानान् सहस्रश:।
पुरे क्रौञ्चवने दुर्गे राजवंशबहिष्कृत:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजकुल से बहिष्कृत यदुना ने नगर में तथा दुर्गम क्रौंच वन में सहस्रों यातुधानों को जन्म दिया ॥20॥
 
Excluded from the royal family, Yaduna gave birth to thousands of Yatudhanas in the city and in the inaccessible Krauncha forest. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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