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ramayan 7.59.14: यदो! मैंने दुर्जय क्षत्रिय के वेश में तुम्हारे समान राक्षस को जन्म दिया है। तुमने मेरी आज्ञा का उल्लंघन किया है, अतः तुम्हें अपने बच्चों को शासक बनाने की इच्छा से निराश होना चाहिए॥ 14॥   |   ramayan सर्ग 7.59: ययाति का अपने पुत्र पूरु को अपना बुढ़ापा देकर बदले में उसका यौवन लेना और भोगों से तृप्त होकर पुनः दीर्घकाल के बाद उसे उसका यौवन लौटा देना, पूरु का अपने पिता की गद्दी पर अभिषेक तथा यदु को शाप   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 59: ययाति का अपने पुत्र पूरु को अपना बुढ़ापा देकर बदले में उसका यौवन लेना और भोगों से तृप्त होकर पुनः दीर्घकाल के बाद उसे उसका यौवन लौटा देना, पूरु का अपने पिता की गद्दी पर अभिषेक तथा यदु को शाप  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.59.14 
राक्षसस्त्वं मया जात: क्षत्ररूपो दुरासद:।
प्रतिहंसि ममाज्ञां त्वं प्रजार्थे विफलो भव॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यदो! मैंने दुर्जय क्षत्रिय के वेश में तुम्हारे समान राक्षस को जन्म दिया है। तुमने मेरी आज्ञा का उल्लंघन किया है, अतः तुम्हें अपने बच्चों को शासक बनाने की इच्छा से निराश होना चाहिए॥ 14॥
 
Yado! I gave birth to a demon like you in the guise of a Durjay Kshatriya. You have violated my command, hence you should be disappointed in your desire to make your children rulers.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)