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श्लोक 7.59.11  |
न्यासभूता मया पुत्र त्वयि संक्रामिता जरा।
तस्मात् प्रतिगृहीष्यामि तां जरां मा व्यथां कृथा:॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| ‘बेटा! मैंने तुम्हारे शरीर को विरासत में बुढ़ापा दिया था, इसलिए मैं उसे वापस ले लूँगा। तुम मन में शोक मत करो॥ 11॥ |
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| ‘Son! I had transferred old age to your body as a legacy; therefore I will take it back. Do not feel sad in your heart.॥ 11॥ |
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