Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.59.11: ‘बेटा! मैंने तुम्हारे शरीर को विरासत में बुढ़ापा दिया था, इसलिए मैं उसे वापस ले लूँगा। तुम मन में शोक मत करो॥ 11॥   |   ramayan सर्ग 7.59: ययाति का अपने पुत्र पूरु को अपना बुढ़ापा देकर बदले में उसका यौवन लेना और भोगों से तृप्त होकर पुनः दीर्घकाल के बाद उसे उसका यौवन लौटा देना, पूरु का अपने पिता की गद्दी पर अभिषेक तथा यदु को शाप   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 59: ययाति का अपने पुत्र पूरु को अपना बुढ़ापा देकर बदले में उसका यौवन लेना और भोगों से तृप्त होकर पुनः दीर्घकाल के बाद उसे उसका यौवन लौटा देना, पूरु का अपने पिता की गद्दी पर अभिषेक तथा यदु को शाप  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.59.11 
न्यासभूता मया पुत्र त्वयि संक्रामिता जरा।
तस्मात् प्रतिगृहीष्यामि तां जरां मा व्यथां कृथा:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
‘बेटा! मैंने तुम्हारे शरीर को विरासत में बुढ़ापा दिया था, इसलिए मैं उसे वापस ले लूँगा। तुम मन में शोक मत करो॥ 11॥
 
‘Son! I had transferred old age to your body as a legacy; therefore I will take it back. Do not feel sad in your heart.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)