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ramayan 7.59.10: बहुत समय बीतने पर राजा ने पुरु से कहा - 'बेटा! मेरा बुढ़ापा जो तुम्हारे पास जमा है, उसे मुझे लौटा दो॥10॥   |   ramayan सर्ग 7.59: ययाति का अपने पुत्र पूरु को अपना बुढ़ापा देकर बदले में उसका यौवन लेना और भोगों से तृप्त होकर पुनः दीर्घकाल के बाद उसे उसका यौवन लौटा देना, पूरु का अपने पिता की गद्दी पर अभिषेक तथा यदु को शाप   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 59: ययाति का अपने पुत्र पूरु को अपना बुढ़ापा देकर बदले में उसका यौवन लेना और भोगों से तृप्त होकर पुनः दीर्घकाल के बाद उसे उसका यौवन लौटा देना, पूरु का अपने पिता की गद्दी पर अभिषेक तथा यदु को शाप  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.59.10 
अथ दीर्घस्य कालस्य राजा पूरुमथाब्रवीत्।
आनयस्व जरां पुत्र न्यासं निर्यातयस्व मे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
बहुत समय बीतने पर राजा ने पुरु से कहा - 'बेटा! मेरा बुढ़ापा जो तुम्हारे पास जमा है, उसे मुझे लौटा दो॥10॥
 
After a long period of time, the king said to Puru - 'Son! Give me back my old age which is kept with you as a deposit.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)