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ramayan 7.58.4-5h: लक्ष्मण के ऐसा कहने पर श्रेष्ठ क्षत्रिय और दूसरों के मन को प्रसन्न करने वाले, सम्पूर्ण शास्त्रों के ज्ञाता और उनके तेजस्वी भाई श्री रामजी ने लक्ष्मण से कहा - ॥4 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.58: ययाति को शुक्राचार्य का शाप   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 58: ययाति को शुक्राचार्य का शाप  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  7.58.4-5h 
एवमुक्तस्तु तेनायं राम: क्षत्रियपुङ्गव:।
उवाच लक्ष्मणं वाक्यं सर्वशास्त्रविशारदम्॥ ४॥
रामो रमयतां श्रेष्ठो भ्रातरं दीप्ततेजसम्।
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण के ऐसा कहने पर श्रेष्ठ क्षत्रिय और दूसरों के मन को प्रसन्न करने वाले, सम्पूर्ण शास्त्रों के ज्ञाता और उनके तेजस्वी भाई श्री रामजी ने लक्ष्मण से कहा - ॥4 1/2॥
 
On Lakshman saying this, Shri Ram, the best Kshatriya and the one who amuses the hearts of others, the knowledgeable of all the scriptures and his brilliant brother, said to Lakshman - ॥ 4 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)