श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 57: वसिष्ठ का नूतन शरीर धारण और निमि का प्राणियों के नयनों में निवास  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.57.21 
इति सर्वमशेषतो मया
कथितं सम्भवकारणं तु सौम्य।
नृपपुङ्गवशापजं द्विजस्य
द्विजशापाच्च यदद्भुतं नृपस्य॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे लक्ष्मण! राजाओं में श्रेष्ठ निमिक के शाप से ब्राह्मण वसिष्ठ का अद्भुत जन्म तथा ब्राह्मण वसिष्ठ के शाप से राजा निमिक का जन्म, इन सबका सम्पूर्ण कारण मैंने तुमसे कह दिया है।'
 
Gentle Lakshmana! I have told you the whole reason behind the wonderful birth of Brahmin Vasishtha due to the curse of Nimik, the best of kings, and the birth of King Nimik due to the curse of Brahmin Vasishtha.'
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे सप्तपञ्चाश: सर्ग: ॥ ५ ७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें सत्तावनवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ५ ७॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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