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त्वत्कृते च निमिष्यन्ति चक्षूंषि पृथिवीपते।
वायुभूतेन चरता विश्रामार्थं मुहुर्मुहु:॥ १६॥
अनुवाद
हे पृथ्वीपति! वायु रूप में विचरण करते समय आपके संग से उत्पन्न हुई थकान दूर होकर जीवों की आँखें विश्राम पाने के लिए बार-बार बंद हो जाएँगी।॥16॥
Lord of the Earth! The eyes of the living beings will close again and again to get rest after getting rid of the fatigue caused by your association while moving in the form of air.'॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥