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ramayan 7.57.15: तब देवताओं ने निमिका के आत्मा से कहा - 'बहुत अच्छा, तुम वायु का रूप धारण करके समस्त प्राणियों के नेत्रों में विचरण करोगी ॥15॥   |   ramayan सर्ग 7.57: वसिष्ठ का नूतन शरीर धारण और निमि का प्राणियों के नयनों में निवास   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 57: वसिष्ठ का नूतन शरीर धारण और निमि का प्राणियों के नयनों में निवास  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.57.15 
बाढमित्येव विबुधा निमेश्चेतस्तदाब्रुवन्।
नेत्रेषु सर्वभूतानां वायुभूतश्चरिष्यसि॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तब देवताओं ने निमिका के आत्मा से कहा - 'बहुत अच्छा, तुम वायु का रूप धारण करके समस्त प्राणियों के नेत्रों में विचरण करोगी ॥15॥
 
Then the gods said to the soul of Nimika, 'Very well, you will take the form of the wind and roam in the eyes of all living beings.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)