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ramayan 7.57.14: जब सब देवताओं ने ऐसा कहा, उस समय निमिका की आत्मा ने उनसे कहा - 'सुरश्रेष्ठ! मैं सब प्राणियों के नेत्रों में निवास करना चाहती हूँ ॥14॥   |   ramayan सर्ग 7.57: वसिष्ठ का नूतन शरीर धारण और निमि का प्राणियों के नयनों में निवास   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 57: वसिष्ठ का नूतन शरीर धारण और निमि का प्राणियों के नयनों में निवास  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.57.14 
एवमुक्त: सुरै: सर्वैर्निमेश्चेतस्तदाब्रवीत्।
नेत्रेषु सर्वभूतानां वसेयं सुरसत्तमा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जब सब देवताओं ने ऐसा कहा, उस समय निमिका की आत्मा ने उनसे कहा - 'सुरश्रेष्ठ! मैं सब प्राणियों के नेत्रों में निवास करना चाहती हूँ ॥14॥
 
When all the gods said this, Nimika's soul said to them at that time - 'Surashrestha! I want to reside in the eyes of all living beings. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)