Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.57.13: भृगु के साथ-साथ अन्य सभी देवता भी अत्यंत प्रसन्न हुए और निमिके की आत्मा से बोले - 'राजर्षे! वर माँगो। तुम्हारी जीवित चेतना कहाँ स्थापित हो?'   |   ramayan सर्ग 7.57: वसिष्ठ का नूतन शरीर धारण और निमि का प्राणियों के नयनों में निवास   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 57: वसिष्ठ का नूतन शरीर धारण और निमि का प्राणियों के नयनों में निवास  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.57.13 
सुप्रीताश्च सुरा: सर्वे निमेश्चेतस्तदाब्रुवन्।
वरं वरय राजर्षे क्व ते चेतो निरूप्यताम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भृगु के साथ-साथ अन्य सभी देवता भी अत्यंत प्रसन्न हुए और निमिके की आत्मा से बोले - 'राजर्षे! वर माँगो। तुम्हारी जीवित चेतना कहाँ स्थापित हो?'
 
Along with Bhrigu, all the other gods also became very happy and said to Nimike's soul - 'Rajarshe! Ask for a boon. Where should your living consciousness be established?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)