Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.57.12: तत्पश्चात् यज्ञ समाप्त होने पर भृगुन ने कहा - 'हे राजन! (राजा के शरीर के अभिमानी आत्मा!) मैं तुमसे बहुत संतुष्ट हूँ, अतः यदि तुम्हारी इच्छा हो तो मैं तुम्हारी आत्मा को पुनः इस शरीर में ले आऊँगा॥12॥ | ramayan सर्ग 7.57: वसिष्ठ का नूतन शरीर धारण और निमि का प्राणियों के नयनों में निवास । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् यज्ञ समाप्त होने पर भृगुन ने कहा - 'हे राजन! (राजा के शरीर के अभिमानी आत्मा!) मैं तुमसे बहुत संतुष्ट हूँ, अतः यदि तुम्हारी इच्छा हो तो मैं तुम्हारी आत्मा को पुनः इस शरीर में ले आऊँगा॥12॥
After that, when the Yagya was over, Bhrigun said - 'O King! (The proud soul of the king's body!) I am very satisfied with you, so if you wish, I will bring your soul back into this body. 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥