श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 57: वसिष्ठ का नूतन शरीर धारण और निमि का प्राणियों के नयनों में निवास  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.57.11 
तं च देहं नरेन्द्रस्य रक्षन्ति स्म द्विजोत्तमा:।
गन्धैर्माल्यैश्च वस्त्रैश्च पौरभृत्यसमन्विता:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उन महर्षियों ने नगरवासियों और सेवकों के साथ मिलकर राजा निमिक के शरीर को तेल आदि के कड़ाहों में सुगन्धित द्रव्य, पुष्प और वस्त्रों सहित सुरक्षित रखा॥11॥
 
Those great sages, along with the people of the city and their servants, preserved the body of King Nimik along with perfumes, flowers and clothes in oil cauldrons etc.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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