Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.57.10: राजा निमिको को अपने शरीर से पृथक् देखकर उन सभी बुद्धिमान ऋषियों ने स्वयं ही यज्ञ में दीक्षा ली और यज्ञ को पूर्ण किया॥10॥   |   ramayan सर्ग 7.57: वसिष्ठ का नूतन शरीर धारण और निमि का प्राणियों के नयनों में निवास   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 57: वसिष्ठ का नूतन शरीर धारण और निमि का प्राणियों के नयनों में निवास  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.57.10 
दृष्ट्वा विदेहं राजानमृषय: सर्व एव ते।
तं च ते याजयामासुर्यज्ञदीक्षां मनीषिण:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजा निमिको को अपने शरीर से पृथक् देखकर उन सभी बुद्धिमान ऋषियों ने स्वयं ही यज्ञ में दीक्षा ली और यज्ञ को पूर्ण किया॥10॥
 
Beholding King Nimiko separated from his body, all those wise sages themselves took initiation in the sacrifice and completed the sacrifice.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)