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ramayan 7.57.1: वह दिव्य और अद्भुत कथा सुनकर लक्ष्मण बहुत प्रसन्न हुए और श्री रघुनाथजी से बोले -॥1॥   |   ramayan सर्ग 7.57: वसिष्ठ का नूतन शरीर धारण और निमि का प्राणियों के नयनों में निवास   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 57: वसिष्ठ का नूतन शरीर धारण और निमि का प्राणियों के नयनों में निवास  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.57.1 
तां श्रुत्वा दिव्यसंकाशां कथामद्भुतदर्शनाम्।
लक्ष्मण: परमप्रीतो राघवं वाक्यमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वह दिव्य और अद्भुत कथा सुनकर लक्ष्मण बहुत प्रसन्न हुए और श्री रघुनाथजी से बोले -॥1॥
 
Lakshmana was very pleased to hear that divine and wonderful story. He said to Shri Raghunathji -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)