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श्लोक 7.56.8-9h  |
सर्वेषां देहहीनानां महद् दु:खं भविष्यति।
लुप्यन्ते सर्वकार्याणि हीनदेहस्य वै प्रभो॥ ८॥
देहस्यान्यस्य सद्भावे प्रसादं कर्तुमर्हसि। |
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| अनुवाद |
| प्रभु! सभी अशरीरी प्राणी महान दुःख भोगते हैं और भोगते रहेंगे; क्योंकि अशरीरी प्राणी के सभी कर्म नष्ट हो जाते हैं। अतः आप मुझे दूसरा शरीर प्राप्त करने की कृपा करें।॥8 1/2॥ |
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| ‘Prabhu! All the bodiless beings suffer and will continue to suffer great sorrow; because all the activities of a bodiless being are lost. Therefore, please bless me to obtain another body.’॥ 8 1/2॥ |
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