Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.56.6: धर्म के ज्ञाता वसिष्ठजी ने वायुरूपी भगवान ब्रह्माजी के चरणों में प्रणाम करके उन पितामह से इस प्रकार कहा - ॥6॥ | ramayan सर्ग 7.56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्म के ज्ञाता वसिष्ठजी ने वायुरूपी भगवान ब्रह्माजी के चरणों में प्रणाम करके उन पितामह से इस प्रकार कहा - ॥6॥
Vasisthaji, the knowledgeable person of religion, in the form of air, bowed at the feet of Devadhidev Brahmaji and said to that grandfather in this way - ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥