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ramayan 7.56.5: जब महर्षि वशिष्ठ शरीरहीन हो गए, तब वे दूसरा शरीर प्राप्त करने के लिए अपने पिता ब्रह्माजी के पास गए ॥5॥   |   ramayan सर्ग 7.56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.56.5 
अशरीर: शरीरस्य कृतेऽन्यस्य महामुनि:।
वसिष्ठस्तु महातेजा जगाम पितुरन्तिकम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब महर्षि वशिष्ठ शरीरहीन हो गए, तब वे दूसरा शरीर प्राप्त करने के लिए अपने पिता ब्रह्माजी के पास गए ॥5॥
 
When the great sage Vashishtha became bodyless, he went to his father Brahmaji to get another body. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)