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ramayan 7.56.28: जब देवताओं के राजा इंद्र ने वृत्रासुर पर वज्र से प्रहार किया था और ब्राह्मण हत्या के भय से छिप गए थे, तब नहुष ने ही इंद्र का पद स्थापित कर एक लाख वर्षों तक तीनों लोकों पर शासन किया था।   |   ramayan सर्ग 7.56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.56.28 
वज्रमुत्सृज्य वृत्राय श्रान्तेऽथ त्रिदिवेश्वरे।
शतं वर्षसहस्राणि येनेन्द्रत्वं प्रशासितम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जब देवताओं के राजा इंद्र ने वृत्रासुर पर वज्र से प्रहार किया था और ब्राह्मण हत्या के भय से छिप गए थे, तब नहुष ने ही इंद्र का पद स्थापित कर एक लाख वर्षों तक तीनों लोकों पर शासन किया था।
 
When Lord Indra, the king of the gods, had struck Vritraasura with his thunderbolt and had gone into hiding out of fear of the murder of a brahmin, it was Nahusha who, established the position of Indra, ruled over the three worlds for one lakh years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)