श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.56.27 
तस्य जज्ञे तत: श्रीमानायु: पुत्रो महाबल:।
नहुषो यस्य पुत्रस्तु बभूवेन्द्रसमद्युति:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
‘पुरुरवा की उर्वशी के गर्भ से श्रीमान् आयु नामक अत्यन्त पराक्रमी पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसका पुत्र राजा नहुष हुआ, जो इन्द्र के समान तेजस्वी था ॥27॥
 
‘From the womb of Urvashi of Pururva, a very powerful son named Shriman Ayu was born, whose son was King Nahusha, who was as brilliant as Indra. 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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