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ramayan 7.56.26: 'फिर शाप से कलंकित होकर वह प्रतिष्ठानपुर (प्रयाग-झूसी) में बुध के पुत्र पुरुरवा के पास चली गई।   |   ramayan सर्ग 7.56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.56.26 
तत: सा शापदोषेण पुरूरवसमभ्यगात्।
प्रतिष्ठाने पुरूरवं बुधस्यात्मजमौरसम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'फिर शाप से कलंकित होकर वह प्रतिष्ठानपुर (प्रयाग-झूसी) में बुध के पुत्र पुरुरवा के पास चली गई।
 
‘Then, tainted by the curse, she went to Pratishthanpur (Prayag-Jhusi) to Pururava, the son of Budha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)