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श्लोक 7.56.24  |
अनेन दुष्कृतेन त्वं मत्क्रोधकलुषीकृता।
मनुष्यलोकमास्थाय कंचित् कालं निवत्स्यसि॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| ‘तुम्हारे इस पाप के कारण तुम मेरे क्रोध से कलंकित होगे और तुम्हें कुछ समय के लिए मनुष्य लोक में जाकर रहना पड़ेगा।॥ 24॥ |
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| ‘Due to this sin of yours, you will be tainted by my anger and will have to go and live in the human world for some time.॥ 24॥ |
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