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ramayan 7.56.23: दुष्टा! पहले तो मैंने तुझे समागम के लिए बुलाया था; फिर तूने मुझे त्यागकर दूसरा पति क्यों ग्रहण किया?॥23॥   |   ramayan सर्ग 7.56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.56.23 
मयाभिमन्त्रिता पूर्वं कस्मात् त्वमवसर्जिता।
पतिमन्यं वृतवती किमर्थं दुष्टचारिणि॥ २३॥
 
 
अनुवाद
दुष्टा! पहले तो मैंने तुझे समागम के लिए बुलाया था; फिर तूने मुझे त्यागकर दूसरा पति क्यों ग्रहण किया?॥23॥
 
‘Wicked woman! First I had invited you for intercourse; then why did you abandon me and accept another husband?॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)