श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.56.21 
उर्वश्या एवमुक्तस्तु रेतस्तन्महदद्भुतम्।
ज्वलदग्निसमप्रख्यं तस्मिन् कुम्भे न्यवासृजत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उर्वशी के ऐसा कहने पर वरुण ने अपना अद्भुत वीर्य, ​​जो प्रज्वलित अग्नि के समान चमक रहा था, उस पात्र में डाल दिया।
 
Upon Urvashi saying this, Varuna poured his wonderful semen, shining like a blazing fire, into the pot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)