श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.56.2 
निक्षिप्य देहौ काकुत्स्थ कथं तौ द्विजपार्थिवौ।
पुनर्देहेन संयोगं जग्मतुर्देवसम्मतौ॥ २॥
 
 
अनुवाद
ककुत्स्थकुलभूषण! वे ब्रह्मर्षि और वे भूपाल दोनों ही देवताओं द्वारा भी सम्मानित थे। उन्होंने शरीर त्यागकर किस प्रकार नया शरीर धारण किया?॥2॥
 
Kakutsthakulbhushan! Both that Brahmarshi and that Bhupal were respected even by the gods. How did they take a new body after giving up their bodies?'॥ 2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas