श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.56.19 
तस्य तल्लोकनाथस्य वरुणस्य सुभाषितम्।
उर्वशी परमप्रीता श्रुत्वा वाक्यमुवाच ह॥ १९॥
 
 
अनुवाद
लोकनाथ वरुण के ये प्रिय वचन सुनकर उर्वशी बहुत प्रसन्न हुई और बोली-॥19॥
 
Urvashi was very pleased to hear these lovely words of Loknath Varuna and she said -॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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