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श्लोक 7.56.16  |
प्रत्युवाच तत: सा तु वरुणं प्राञ्जलि: स्थिता।
मित्रेणाहं वृता साक्षात् पूर्वमेव सुरेश्वर॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| तब उर्वशी ने हाथ जोड़कर वरुण से कहा - 'हे देवराज! मित्रदेव ने स्वयं मुझे चुन लिया है।'॥16॥ |
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| ‘Then Urvashi folded her hands and said to Varuna - 'O Lord of all gods! The god Mitra himself has already chosen me.'॥ 16॥ |
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