श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.56.16 
प्रत्युवाच तत: सा तु वरुणं प्राञ्जलि: स्थिता।
मित्रेणाहं वृता साक्षात् पूर्वमेव सुरेश्वर॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तब उर्वशी ने हाथ जोड़कर वरुण से कहा - 'हे देवराज! मित्रदेव ने स्वयं मुझे चुन लिया है।'॥16॥
 
‘Then Urvashi folded her hands and said to Varuna - 'O Lord of all gods! The god Mitra himself has already chosen me.'॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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