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ramayan 7.56.13: उसी समय अप्सराओं में श्रेष्ठ उर्वशी अपनी सखियों से घिरी हुई अचानक उस स्थान पर आ पहुँची॥13॥   |   ramayan सर्ग 7.56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.56.13 
एतस्मिन्नेव काले तु उर्वशी परमाप्सरा:।
यदृच्छया तमुद्देशमागता सखिभिर्वृता॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उसी समय अप्सराओं में श्रेष्ठ उर्वशी अपनी सखियों से घिरी हुई अचानक उस स्थान पर आ पहुँची॥13॥
 
‘At this very time Urvashi, the best of the Apsaras, surrounded by her friends, suddenly arrived at that place.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)