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ramayan 7.56.12: उस समय मित्रदेवता भी वरुणदेवता के अधीन रहते थे। वे वरुणदेवता के साथ रहते थे और समस्त देवताओं द्वारा पूजित थे।॥12॥   |   ramayan सर्ग 7.56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.56.12 
तमेव कालं मित्रोऽपि वरुणत्वमकारयत्।
क्षीरोदेन सहोपेत: पूज्यमान: सुरेश्वरै:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उस समय मित्रदेवता भी वरुणदेवता के अधीन रहते थे। वे वरुणदेवता के साथ रहते थे और समस्त देवताओं द्वारा पूजित थे।॥12॥
 
‘At that time Mitradevata was also following the authority of Varuna. He stayed with Varuna and was worshipped by all the deities.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)