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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 56: ब्रह्माजी के कहने से वसिष्ठ का वरुण के वीर्य में आवेश, वरुण का उर्वशी के समीप एक कुम्भ में अपने वीर्य का आधान तथा मित्र के शाप से उर्वशी का भूतल में राजा पुरुरवा के पास रहकर पुत्र उत्पन्न करना
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श्लोक 1
श्लोक
7.56.1
रामस्य भाषितं श्रुत्वा लक्ष्मण: परवीरहा।
उवाच प्राञ्जलिर्भूत्वा राघवं दीप्ततेजसम्॥ १॥
अनुवाद
भगवान राम द्वारा कही गई यह कथा सुनकर शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले लक्ष्मण हाथ जोड़कर तेजस्वी श्री रघुनाथजी से बोले-॥1॥
On hearing this tale narrated by Lord Rama, Lakshmana, the slayer of enemy warriors, folded his hands and spoke to the radiant Sri Raghunatha -॥ 1॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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