श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 55: राजा निमि और वसिष्ठ का एक-दूसरे के शाप से देहत्याग  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.55.11 
अनन्तरं महाविप्रो गौतम: प्रत्यपूरयत्।
वसिष्ठोऽपि महातेजा इन्द्रयज्ञमथाकरोत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वशिष्ठजी के चले जाने पर महाबली महर्षि गौतम ने आकर उनका कार्य पूर्ण किया। उधर महातेजस्वी वशिष्ठजी भी इन्द्र का यज्ञ सम्पन्न करने लगे। 11॥
 
After Vashishthaji left, the great Brahmin Maharishi Gautam came and completed his work. On the other hand, the great and brilliant Vashishtha also started completing Indra's yagya. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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