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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 55: राजा निमि और वसिष्ठ का एक-दूसरे के शाप से देहत्याग  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.55.1 
एष ते नृगशापस्य विस्तरोऽभिहितो मया।
यद्यस्ति श्रवणे श्रद्धा शृणुष्वेहापरां कथाम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
(श्रीरामजी ने कहा-) 'लक्ष्मण! इस प्रकार मैंने तुम्हें राजा नृग के शाप का विवरण विस्तारपूर्वक सुनाया है। यदि तुम सुनना चाहते हो तो दूसरी कथा भी सुनो।'॥1॥
 
(Shri Ram said-) 'Lakshman! In this way I have told you in detail about the curse of King Nriga. If you wish to listen then listen to the other story also.'॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)