श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 54: राजा नृग का एक सुन्दर गड्ढा बनवाकर अपने पुत्र को राज्य दे स्वयं उसमें प्रवेश करके शाप भोगना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.54.2 
अल्पापराधे काकुत्स्थ द्विजाभ्यां शाप ईदृश:।
महान् नृगस्य राजर्षेर्यमदण्ड इवापर:॥ २॥
 
 
अनुवाद
‘ककुत्स्थकुलभूषण! उन दोनों ब्राह्मणों ने एक छोटे से अपराध के कारण राजा नृग को दूसरा यमदण्ड जैसा महान शाप दे दिया॥2॥
 
‘Kakutsthakulbhushan! Those two Brahmins, for a small crime, gave such a great curse to the king sage Nriga as the second Yamadanda. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)