श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 54: राजा नृग का एक सुन्दर गड्ढा बनवाकर अपने पुत्र को राज्य दे स्वयं उसमें प्रवेश करके शाप भोगना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.54.18 
एवमुक्त्वा नृपस्तत्र सुतं राजा महायशा:।
श्वभ्रं जगाम सुकृतं वासाय पुरुषर्षभ॥ १८॥
 
 
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! अपने पुत्र से ऐसा कहकर यशस्वी नरपालराज नृग ने अपने निवास के लिए सुन्दर रूप से तैयार किए गए कुण्ड में प्रवेश किया॥18॥
 
Narshrestha! Having said this to his son, the illustrious Narpal King Nriga entered the pit beautifully prepared for his residence. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)