Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.53.4: सौम्य! हे सुमित्रापुत्र! चार दिन हो गए, मैंने नगरवासियों के लिए कोई काम नहीं किया, यह बात मेरे हृदय में चुभ रही है।   |   ramayan सर्ग 7.53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.53.4 
चत्वारो दिवसा: सौम्य कार्यं पौरजनस्य च।
अकुर्वाणस्य सौमित्रे तन्मे मर्माणि कृन्तति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! हे सुमित्रापुत्र! चार दिन हो गए, मैंने नगरवासियों के लिए कोई काम नहीं किया, यह बात मेरे हृदय में चुभ रही है।
 
Soumya! O son of Sumitra! It has been four days since I have not done any work for the people of the city, this thing is piercing my heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)