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ramayan 7.53.3: शुभ शकुन लक्ष्मण! अब मेरे मन की बात सुनो और सुनकर वैसा ही करो।   |   ramayan सर्ग 7.53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.53.3 
यच्च मे हृदये किंचिद् वर्तते शुभलक्षण।
तन्निशामय च श्रुत्वा कुरुष्व वचनं मम॥ ३॥
 
 
अनुवाद
शुभ शकुन लक्ष्मण! अब मेरे मन की बात सुनो और सुनकर वैसा ही करो।
 
Good omen Lakshmana! Now listen to what I have in mind and do the same after listening to it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)