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ramayan 7.53.25-26: अतः जिस मनुष्य में कुछ करने की इच्छा हो, वह शीघ्र ही मेरे समक्ष उपस्थित हो। क्या राजा को प्रजा की रक्षा करने के पुण्य का फल नहीं मिलता? अवश्य मिलता है। अतः हे सुमित्रापुत्र! तुम राजद्वार पर जाकर प्रतीक्षा करो कि कौन मनुष्य कुछ करने की इच्छा लेकर आ रहा है।॥25-26॥   |   ramayan सर्ग 7.53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  7.53.25-26 
तच्छीघ्रं दर्शनं मह्यमभिवर्तन्तु कार्यिण:॥ २५॥
सुकृतस्य हि कार्यस्य फलं नावैति पार्थिव:।
तस्माद् गच्छ प्रतीक्षस्व सौमित्रे कार्यवाञ्जन:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
अतः जिस मनुष्य में कुछ करने की इच्छा हो, वह शीघ्र ही मेरे समक्ष उपस्थित हो। क्या राजा को प्रजा की रक्षा करने के पुण्य का फल नहीं मिलता? अवश्य मिलता है। अतः हे सुमित्रापुत्र! तुम राजद्वार पर जाकर प्रतीक्षा करो कि कौन मनुष्य कुछ करने की इच्छा लेकर आ रहा है।॥25-26॥
 
‘Therefore, the person who has the desire to do something should present himself before me soon. Doesn't the king get the fruit of the pious act of protecting his subjects? He surely gets it. Therefore, Sumitra's son! You go and wait at the royal gate to see which person is coming with the desire to do something.'॥ 25-26॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे त्रिपञ्चाश: सर्ग: ॥ ५ ३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें तिरपनवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ५ ३॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)