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ramayan 7.53.16-17h: वे वहाँ गए और कई दिनों तक राजमहल के द्वार पर बैठे रहे, परन्तु राजा से उन्हें न्याय नहीं मिला (वे उनसे मिले भी नहीं)। इससे वे दोनों बहुत क्रोधित हुए।   |   ramayan सर्ग 7.53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.53.16-17h 
तौ राजभवनद्वारि न प्राप्तौ नृगशासनम्॥ १६॥
अहोरात्राण्यनेकानि वसन्तौ क्रोधमीयतु:।
 
 
अनुवाद
वे वहाँ गए और कई दिनों तक राजमहल के द्वार पर बैठे रहे, परन्तु राजा से उन्हें न्याय नहीं मिला (वे उनसे मिले भी नहीं)। इससे वे दोनों बहुत क्रोधित हुए।
 
‘They went there and stayed at the door of the royal palace for many days, but they did not get justice from the king (they did not even meet him). This made both of them very angry. 16 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)