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ramayan 7.53.14-15h: 'उन दिनों जो ब्राह्मण गाय की देखभाल कर रहा था, वह भी तुरन्त गाय के पीछे-पीछे गया और ऋषि से बोला, "ब्राह्मण! यह गाय मेरी है। राजाओं में श्रेष्ठ नृग ने इसे मुझे दान में दिया है।"   |   ramayan सर्ग 7.53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  7.53.14-15h 
योऽपि पालयते विप्र: सोऽपि गामन्वगाद् द्रुतम्।
गत्वा च तमृषिं चष्टे मम गौरिति सत्वरम्॥ १४॥
स्पर्शिता राजसिंहेन मम दत्ता नृगेण ह।
 
 
अनुवाद
'उन दिनों जो ब्राह्मण गाय की देखभाल कर रहा था, वह भी तुरन्त गाय के पीछे-पीछे गया और ऋषि से बोला, "ब्राह्मण! यह गाय मेरी है। राजाओं में श्रेष्ठ नृग ने इसे मुझे दान में दिया है।"
 
‘The Brahmin who was taking care of the cow in those days also immediately followed the cow and told the sage, “Brahmin! This cow is mine. Nriga, the best of kings, has given it to me as a donation.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)