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ramayan 7.53.13: भूखे ब्राह्मण की चिरपरिचित आवाज पहचानकर गाय आगे बढ़ी और उस ब्राह्मण के पीछे-पीछे चली, जिसका तेज अग्नि के समान था।   |   ramayan सर्ग 7.53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.53.13 
तस्य तं स्वरमाज्ञाय क्षुधार्तस्य द्विजस्य वै।
अन्वगात् पृष्ठत: सा गौर्गच्छन्तं पावकोपमम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भूखे ब्राह्मण की चिरपरिचित आवाज पहचानकर गाय आगे बढ़ी और उस ब्राह्मण के पीछे-पीछे चली, जिसका तेज अग्नि के समान था।
 
Recognizing the familiar voice of the hungry Brahmin, the cow went ahead and followed the Brahmin whose brilliance was like fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)