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ramayan 7.53.1: लक्ष्मण के वे अद्भुत वचन सुनकर श्री रामचन्द्रजी अत्यन्त प्रसन्न हुए और इस प्रकार बोले -   |   ramayan सर्ग 7.53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का कार्यार्थी पुरुषों की उपेक्षा से राजा नृग को मिलने वाली शाप की कथा सुनाकर लक्ष्मण को देखभाल के लिये आदेश देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.53.1 
लक्ष्मणस्य तु तद् वाक्यं निशम्य परमाद्भुतम्।
सुप्रीतश्चाभवद् रामो वाक्यमेतदुवाच ह॥ १॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण के वे अद्भुत वचन सुनकर श्री रामचन्द्रजी अत्यन्त प्रसन्न हुए और इस प्रकार बोले -
 
Hearing those wonderful words of Lakshman, Shri Ramchandraji became very happy and spoke thus -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)