Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.52.8-9: वीर महाराज की आज्ञा मानकर मैं सुशील एवं यशस्वी जनकपुत्री सीता को गंगा तट पर वाल्मीकि के शुभ आश्रम के निकट निर्दिष्ट स्थान पर छोड़कर पुनः आपके श्रीचरणों की सेवा के लिए यहाँ आया हूँ॥ 8-9॥ | ramayan सर्ग 7.52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वीर महाराज की आज्ञा मानकर मैं सुशील एवं यशस्वी जनकपुत्री सीता को गंगा तट पर वाल्मीकि के शुभ आश्रम के निकट निर्दिष्ट स्थान पर छोड़कर पुनः आपके श्रीचरणों की सेवा के लिए यहाँ आया हूँ॥ 8-9॥
Having accepted the command of the heroic Maharaja, I have left the well-behaved and famous daughter of Janak, Sita, at the designated place near the auspicious hermitage of Valmiki on the bank of the Ganga and have again returned here to serve your holy feet.॥ 8-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥