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ramayan 7.52.4: जब वे इस विषय पर विचार कर रहे थे, तभी भगवान राम का विशाल महल, जो चन्द्रमा के समान चमकीला था, उनके सामने प्रकट हुआ।   |   ramayan सर्ग 7.52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.52.4 
तस्यैवं चिन्तयानस्य भवनं शशिसंनिभम्।
रामस्य परमोदारं पुरस्तात् समदृश्यत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जब वे इस विषय पर विचार कर रहे थे, तभी भगवान राम का विशाल महल, जो चन्द्रमा के समान चमकीला था, उनके सामने प्रकट हुआ।
 
While he was contemplating on this matter, the huge palace of Lord Rama, as bright as the moon, appeared before him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)