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ramayan 7.52.3: वहाँ पहुँचकर परम बुद्धिमान सुमित्राकुमार बहुत दुःखी हुए और सोचने लगे कि 'श्री रामचन्द्रजी के चरणों के पास जाकर मैं क्या कहूँगा?'॥3॥   |   ramayan सर्ग 7.52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.52.3 
सौमित्रिस्तु परं दैन्यं जगाम सुमहामति:।
रामपादौ समासाद्य वक्ष्यामि किमहं गत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर परम बुद्धिमान सुमित्राकुमार बहुत दुःखी हुए और सोचने लगे कि 'श्री रामचन्द्रजी के चरणों के पास जाकर मैं क्या कहूँगा?'॥3॥
 
On reaching there, the extremely intelligent Sumitrakumar was very sad. He started thinking, 'What will I say when I go near the feet of Shri Ramchandraji?'॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)