Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.52.15: नरेशवर! जिस भय से आपने मिथिलेशकुमारी को त्याग दिया था, वह अपवाद इस नगर में फिर होने लगेगा (लोग कहेंगे कि जो स्त्री दूसरे के घर में रह चुकी है, उसे त्यागकर ये पुरुष उसकी चिन्ता में दिन-रात दुःखी रहते हैं)॥15॥ | ramayan सर्ग 7.52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरेशवर! जिस भय से आपने मिथिलेशकुमारी को त्याग दिया था, वह अपवाद इस नगर में फिर होने लगेगा (लोग कहेंगे कि जो स्त्री दूसरे के घर में रह चुकी है, उसे त्यागकर ये पुरुष उसकी चिन्ता में दिन-रात दुःखी रहते हैं)॥15॥
Nareshwar! The exception due to the fear of which you abandoned Mithilesh Kumari, will undoubtedly start occurring again in this town (people will say that after abandoning the woman who has lived in another's house, these men remain sad day and night worrying about her).॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥