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ramayan 7.52.1: केशिनी नदी के तट पर रात्रि व्यतीत करके, प्रातःकाल उठकर रघुनन्दन और लक्ष्मण वहाँ से आगे चले॥1॥   |   ramayan सर्ग 7.52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 52: अयोध्या के राजभवन में पहुँचकर लक्ष्मण का दुःखी श्रीराम से मिलना और उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.52.1 
तत्र तां रजनीमुष्य केशिन्यां रघुनन्दन:।
प्रभाते पुनरुत्थाय लक्ष्मण: प्रययौ तदा॥ १॥
 
 
अनुवाद
केशिनी नदी के तट पर रात्रि व्यतीत करके, प्रातःकाल उठकर रघुनन्दन और लक्ष्मण वहाँ से आगे चले॥1॥
 
Having spent the night on the banks of the Keshini, Raghunandan and Lakshmana got up in the morning and proceeded further from there. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)