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ramayan 7.51.3: एक दिन आपके अत्यंत शक्तिशाली और यशस्वी पिता स्वयं अपने पुरोहित महात्मा वशिष्ठ से मिलने उस आश्रम में गये।   |   ramayan सर्ग 7.51: मार्ग में सुमन्त्र का दुर्वासा के मुख से सुनी हुर्इ भृगुऋषि के शाप की कथा कहकर तथा भविष्य में होनेवाली कुछ बातें बताकर दुःखी लक्ष्मण को शान्त करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 51: मार्ग में सुमन्त्र का दुर्वासा के मुख से सुनी हुर्इ भृगुऋषि के शाप की कथा कहकर तथा भविष्य में होनेवाली कुछ बातें बताकर दुःखी लक्ष्मण को शान्त करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.51.3 
तमाश्रमं महातेजा: पिता ते सुमहायशा:।
पुरोहितं महात्मानं दिदृक्षुरगमत् स्वयम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
एक दिन आपके अत्यंत शक्तिशाली और यशस्वी पिता स्वयं अपने पुरोहित महात्मा वशिष्ठ से मिलने उस आश्रम में गये।
 
One day your very powerful and famous father himself went to that ashram to meet his priest, Mahatma Vasishtha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)