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ramayan 7.51.27: ‘दुर्वासा ऋषि के वचनों के अनुसार भगवान रघुनाथ सीता के दोनों पुत्रों का अभिषेक अयोध्या में नहीं, बल्कि अयोध्या के बाहर करेंगे।॥ 27॥   |   ramayan सर्ग 7.51: मार्ग में सुमन्त्र का दुर्वासा के मुख से सुनी हुर्इ भृगुऋषि के शाप की कथा कहकर तथा भविष्य में होनेवाली कुछ बातें बताकर दुःखी लक्ष्मण को शान्त करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 51: मार्ग में सुमन्त्र का दुर्वासा के मुख से सुनी हुर्इ भृगुऋषि के शाप की कथा कहकर तथा भविष्य में होनेवाली कुछ बातें बताकर दुःखी लक्ष्मण को शान्त करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.51.27 
सीतायाश्च तत: पुत्रावभिषेक्ष्यति राघव:।
अन्यत्र न त्वयोध्यायां मुनेस्तु वचनं यथा॥ २७॥
 
 
अनुवाद
‘दुर्वासा ऋषि के वचनों के अनुसार भगवान रघुनाथ सीता के दोनों पुत्रों का अभिषेक अयोध्या में नहीं, बल्कि अयोध्या के बाहर करेंगे।॥ 27॥
 
‘As per the words of sage Durvasa, Lord Raghunath will perform the anointment of Sita’s two sons outside Ayodhya, not in Ayodhya.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)