Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.51.18-19: इस प्रकार पूर्वजन्म में (विष्णु-नामक वामन अवतार के समय) परम तेजस्वी भगवान विष्णु को भृगु ऋषि का शाप प्राप्त हुआ था। जो दूसरों को सम्मान देता है, वही श्रेष्ठ है! वही इस पृथ्वी पर आकर आपका पुत्र हुआ है, जो तीनों लोकों में राम नाम से विख्यात है। 18-19॥ | ramayan सर्ग 7.51: मार्ग में सुमन्त्र का दुर्वासा के मुख से सुनी हुर्इ भृगुऋषि के शाप की कथा कहकर तथा भविष्य में होनेवाली कुछ बातें बताकर दुःखी लक्ष्मण को शान्त करना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इति शप्तो महातेजा भृगुणा पूर्वजन्मनि॥ १८॥
इहागतो हि पुत्रत्वं तव पार्थिवसत्तम।
राम इत्यभिविख्यातस्त्रिषु लोकेषु मानद॥ १९॥
अनुवाद
इस प्रकार पूर्वजन्म में (विष्णु-नामक वामन अवतार के समय) परम तेजस्वी भगवान विष्णु को भृगु ऋषि का शाप प्राप्त हुआ था। जो दूसरों को सम्मान देता है, वही श्रेष्ठ है! वही इस पृथ्वी पर आकर आपका पुत्र हुआ है, जो तीनों लोकों में राम नाम से विख्यात है। 18-19॥
In this way, in the previous birth (at the time of Vishnu-named Vaman incarnation), the most brilliant Lord Vishnu had received the curse of Bhrigu Rishi. The one who gives respect to others is the best! It is he who has come to this earth and has become your son, famous by the name of Ram in all the three worlds. 18-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥