Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.51.17-18h: तपस्या द्वारा उनकी आराधना करने पर भक्तव्रती भगवान विष्णु संतुष्ट होकर बोले - 'महर्षि! मैं समस्त जगत को अपना प्रिय बनाने के लिए उस शाप को स्वीकार करूँगा। | ramayan सर्ग 7.51: मार्ग में सुमन्त्र का दुर्वासा के मुख से सुनी हुर्इ भृगुऋषि के शाप की कथा कहकर तथा भविष्य में होनेवाली कुछ बातें बताकर दुःखी लक्ष्मण को शान्त करना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तपस्या द्वारा उनकी आराधना करने पर भक्तव्रती भगवान विष्णु संतुष्ट होकर बोले - 'महर्षि! मैं समस्त जगत को अपना प्रिय बनाने के लिए उस शाप को स्वीकार करूँगा।
After worshiping him through penance, the devotee-loving Lord Vishnu was satisfied and said - 'Maharshe! I will accept that curse to make the whole world dear to me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥